हिंदू धर्म से संबंधित सुधारक संस्थाएँ - आर्य समाज Notes For Prelims Exam and Oneday Exam | आर्य समाज Notes

 हिंदू धर्म से संबंधित सुधारक संस्थाएँ 

हिंदू धर्म से संबंधित सुधारक संस्थाएँ आर्य समाज,आर्य समाज नोट्स, आर्य समाज सामान्य ज्ञान,हिंदू धर्म से संबंधित सुधारक संस्थाएँ आर्य समाज


आर्य समाज 

➤ 1875 में दयानंद सरस्वती ने बंबई में आर्य समाज की स्थापना की । 1877 में आर्य समाज का मुख्यालय लाहौर में स्थापित किया गया । 

➤ आर्य समाज की स्थापना का मुख्य उद्देश्य- हिंदू धर्म में व्याप्त दोषों को उजागर कर उसे दूर करना , वैदिक धर्म को पुनः शुद्ध रूप में स्थापित करना , भारत को सामाजिक , धार्मिक व राजनीतिक रूप से एक सूत्र में बांधना था । 

➤ दयानंद सरस्वती ने ‘ ' वेदों की ओर लौटो ' का नारा देते हुये , वेदों को भारत का आधार स्तंभ बताया । उनका विश्वास था कि हिंदू धर्म व वेद , जिन पर भारत का पुरातन समाज टिका है , वे शाश्वत , अमोघ ( त्रुटिहीन ) , अपरिवर्तनशील , धर्मातीत तथा दैवीय हैं । 

➤ दयानंद ने पुराणों जैसे हिंदू धर्म ग्रंथों की प्रामाणिकता को अस्वीकार किया । वर्ण व्यवस्था के स्थान पर उन्होंने कर्म के आधार को समर्थन दिया । सामाजिक व शैक्षिक मामलों में स्त्री - पुरुष के समान अधिकारों की वकालत की । 

➤ आर्य समाजियों ने छुआछूत , जातिभेद , बाल - विवाह का विरोध किया तथा कुछ शर्तों के साथ विधवा पुनर्विवाह की अनुमति व अंतर्जातीय विवाह का समर्थन किया । 

➤ आर्य समाज द्वारा चलाया गया ' शुद्धि आंदोलन ' काफी विवादास्पद रहा । इसके अंतर्गत किसी कारणवश अन्य धर्म अपनाने वाले हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में वापसी के लिये प्रोत्साहित किया गया । 

➤ ' स्वेदशी व हिंदी ' का समर्थन करने वाला यह प्रथम संगठन था । इसका मानना था कि " भारत भारतीयों के लिये है । " 

➤ दयानद सरस्वती ने ' गो रक्षा आंदोलन ' चलाया । गायों की रक्षा हेतु ' गो रक्षा समिति ' की स्थापना की । 

➤ दयानंद सरस्वती ऐसे प्रथम समाज सुधारक थे , जिन्होंने शूद्रों व स्त्री को वेद पढ़ने , उच्च शिक्षा प्राप्त करने , यज्ञोपवीत धारण करने के पक्ष में आंदोलन चलाया । 

➤ 1863 में उन्होंने बाह्य आंडबरों और झूठे धर्मों का खंडन करते हुए ' पाखंड - खंडिनी पताका ' लहराया । दयानंद सरस्वती के विचार उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ' सत्यार्थ प्रकाश ' में वर्णित हैं । 

➤ दयानंद सरस्वती ने सर्वप्रथम ' स्वराज ' शब्द का प्रयोग किया तथा हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किया । बाल गंगाधर तिलक , लाला लाजपत राय और गोपाल कृष्ण गोखले जिन्होंने हमारे राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया , आर्य समाज से प्रभावित थे । राजनीति के क्षेत्र में उनका मत था कि “ बुरे से बुरा देशी राज्य अच्छे से अच्छे विदेशी राज्य से अच्छा है " । 

➤ दयानंद सरस्वती के सहयोगी लाला हंसराज ने 1886 में दयानंद एंग्लो - वैदिक स्कूल ( लाहौर ) तथा स्वामी श्रद्धानंद ने 1902 में हरिद्वार के निकट कांगड़ी नामक स्थान पर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना की ।

यंग बंगाल आंदोलन 

➽  19 वीं सदी के तृतीय दशक के अंतिम वर्षों में बंगाल के बुद्धिजीवियों के मध्य एक रेडिकल ग्रुप संगठित हुआ , जिसके विचार अधिक क्रांतिकारी थे । इस आंदोलन को ' यंग बंगाल आंदोलन ' के नाम से जाना जाता है । यंग बंगाल आंदोलन के प्रवर्तक हेनरी लुइस विवियन डेरोजियो थे । 

➽ डेरोजियो फ्राँस की क्रांति से बहुत प्रभावित थे । 

➽ समाज सुधार के लिये डेरोजियो ने ' एकेडमिक एसोसिएशन ' और ' सोसायटी फॉर द एक्वीजीशन ऑफ जनरल नॉलेज ' जैसे संगठनों की स्थापना की । 

➽ डेरोजियो ने अपने समर्थकों को सत्य के लिये जीने और मरने , सभी सद्गुणों को अपनाने और उनके अनुसार आचरण करने हेतु प्रोत्साहित किया । 

➽ यंग बंगाल आंदोलन के मुख्य मुद्दे - प्रेस की स्वतंत्रता , ज़मींदारों के अत्याचारों से रैय्यतों की सुरक्षा , सरकारी उच्च सेवाओं में भारतीयों को रोज़गार दिलाना आदि थे । 

➽ डेरोजियो के मुख्य शिष्यों में रामगोपाल घोष , कृष्ण मोहन बनर्जी एवं महेशचंद्र घोष थे ।

➽ सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने डेरोजियो के अनुयायियों को ' बंगाल में आधुनिक सभ्यता के अग्रदूत ' , ' हमारी जाति का पिता ' कहा । 

➽ डेरोज़ियो को आधुनिक भारत का ' प्रथम राष्ट्रवादी कवि ' भी कहा जाता है । 

➽ यंग बंगाल आंदोलन का मूल संदर्भ देशी था , लेकिन इस पर विदेशी प्रभाव को इनकार नहीं किया जा सकता । यंग बंगाल के संस्थापक डेरोजियो स्वयं फ्राँस की क्रांति के सिद्धांतों से प्रभावित थे , साथ ही बंगाल के नौजवानों पर इटली के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव था । 

➽ डेरोज़ियो ने समाचार पत्रों , पुस्तिकाओं और सार्वजनिक संगठनों के माध्यम से लोगों को सामाजिक , आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर जागरूक करने के राजा राममोहन राय की परंपरा का अनुसरण किया । उन्होंने सार्वजनिक आंदोलन , जैसे- प्रेस की स्वतंत्रता विदेश में ब्रिटिश उपनिवेशों में भारतीय श्रमिकों के लिये बेहतर स्थिति , बहुमत वाली ज्यूरी द्वारा मुकदमों की सुनवाई और भारतीयों को सरकारी सेवाओं में उच्च पद जैसे मुद्दों पर खुलकर बहस की ।

हिंदू धर्म से संबंधित सुधारक संस्थाएँ  - आर्य समाज

इस आर्टिकल मे हमने हिंदू धर्म से संबंधित सुधारक संस्थाएँ  - आर्य समाज से संबंधित महवपूर्ण GK के बारे मे जाना है । हम आशा करते है की आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा और यह GK Notes आपके Exam के लिए महवपूर्ण हो । 

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the commnt box.

Previous Post Next Post

نموذج الاتصال