हिंदू धर्म से संबंधित सुधारक संस्थाएँ
रामकृष्ण मिशन
➤ रामकृष्ण परमहंस के शिष्य विवेकानंद द्वारा रामकृष्ण मिशन की स्थापना 1897 में कलकत्ता के समीप बारानगर में की गई ।
➤ स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था ।
➤ रामकृष्ण मिशन की शिक्षाओं , उपनिषदों एवं गीता के दर्शन, बुद्ध एवं यीशु के उपदेशों को आधार बनाकर विवेकानंद ने विश्व को मानव मूल्यों की शिक्षा दी ।
➤ 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित प्रथम विश्व धर्म सम्मेलन ( पार्लियामेंट ऑफ वर्ड्स रिलीज़न्स ) में स्वामी विवेकानंद ने भारत का नेतृत्व किया । इस सम्मेलन में जाने से पूर्व ही नरेंद्रनाथ दत्त का नाम बदलकर महाराज खेतड़ी के सुझाव पर स्वामी विवेकानंद रख दिया गया ।
➤ विवेकानंद ने शिकागो में संपन्न ' विश्व धर्म सम्मेलन ( 1893 ) ' में सभी धर्मों की एकता के विषय में कहा । उन्होंने अध्यात्मवाद एवं भौतिकतावाद के मध्य संतुलन स्थापित कर कहा कि- “ यदि पश्चिम के भौतिकतावाद एवं पूर्व के अध्यात्मवाद का सम्मिश्रण कर दिया जाए तो यह मानव जाति की भलाई का सर्वोत्तम मार्ग होगा ।
➤ विवेकानंद का कहना था कि “ धर्म न पुस्तकों में है , न बौद्धिक विकास में और न तर्क में ; तर्क , सिद्धांत , पुस्तकें और धार्मिक क्रियाएँ आदि केवल धर्म के सहायक हैं , धर्म आत्म - ज्ञान में है ।
➤ वे जातिवाद , छुआछूत एवं विषमता को राष्ट्र की दुर्बलता का कारक मानते थे । उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे प्राचीन सभ्यता पर गर्व करें , अपनी संस्कृति को मानव जाति के कल्याणार्थ हेतु समर्पित करें ।
➤ विवेकानंद ने कहा कि “ जब तक करोड़ों व्यक्ति भूखे और अज्ञानी हैं तब तक मैं उस प्रत्येक व्यक्ति को देशद्रोही मानता हूँ जो उन्हीं के खर्चे पर शिक्षा ग्रहण करता है परंतु उनकी परवाह बिल्कुल नहीं करता ।
➤ स्वामीजी को 19वीं शताब्दी के नव हिंदू जागरण का संस्थापक भी कहा जाता है । सुभाषचंद्र बोस ने स्वामी विवेकानंद को “आधुनिक राष्ट्रीय आंदोलन का आध्यात्मिक पिता" कहा ।
➤ स्वामी विवेकानंद ने प्रबुद्ध भारत ( अंग्रेज़ी ) , उद्बोधन ( बंगाली ) नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन किया । राजयोग , ज्ञानयोग , कर्मयोग व वेदांत फिलॉसफी उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें हैं ।
➤ विवेकानंद से प्रभावित होकर एक विदेशी महिला इनके साथ भारत आई जो सिस्टर निवेदिता ( मार्गरेट नोबल ) के नाम से जानी जाती थीं ।
नोट : रामकृष्ण परमहंस ने चिंतन , संन्यास , भक्ति के परंपरागत तरीकों से धार्मिक मुक्ति प्राप्त करने का प्रयत्न किया । उन्होंने इस बात पर | जोर दिया कि इन मार्गों से सर्वश्रेष्ठ मार्ग मानव सेवा है । मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है ।
थियोसोफिकल सोसायटी
➽ थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना 1875 में न्यूयॉर्क में मैडम हेलना पेट्रोवना ब्लावात्स्की तथा कर्नल हेनरी स्टली ऑल्कॉट ने की थी ।
➽ भारत में 1882 में थियोसोफिकल सोसायटी का अड्यार ( मद्रास ) में अंतर्राष्ट्रीय कार्यालय खोला गया ।
➽ 1889 में एनी बेसेंट इस सोसायटी की इंग्लैंड में सदस्या बनी । वह 1893 में भारत आई और सोसायटी का कार्यभार ग्रहण किया । भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में इनका अद्भुत योगदान रहा ।
➽ थियोसॉफी ( ब्रह्मविद्या ) हिंदू धर्म के आध्यात्मिक दर्शन , उसके धर्म सिद्धांत तथा आत्मा के पुनर्जन्म सिद्धांत का समर्थन करती है ।
➽ थियोसोफिकल सोसायटी पुनर्जन्म व कर्म के सिद्धांत को मान्यता देती थी । इस संस्थान ने बाल विवाह , जातिवाद का विरोध तथा विधवाओं की दशा सुधारने का प्रयास किया ।
➽ भारत में शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिये एनी बेसेंट 1898 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की जो 1916 में मदनमोहन मालवीय जी के प्रयासों से ' बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ' बना ।
➽ एनी बेसेंट ने आयरलैंड की होमरूल के नमूने पर भारत में होमरूल लीग आंदोलन का नेतृत्व किया और 1917 में कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं ।
हिंदू धर्म से संबंधित सुधारक संस्थाएँ : रामकृष्ण मिशन एवं थियोसोफिकल सोसायटी
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