ब्रिटिश ताज के शासनाधीन पारित अधिनियम | ब्रिटिश ताज के शासनाधीन पारित अधिनियम नोट्स

 ब्रिटिश ताज के शासनाधीन पारित अधिनियम GK Notes

ब्रिटिश ताज के शासनाधीन पारित अधिनियम GK notes, भारत शासन अधिनियम 1858,भारत परिषद अधिनियम 1861,भारत परिषद अधिनियम 1892,भारत परिषद अधिनियम 1909, भारत शासन अधिनियम 1919, भारत शासन अधिनियम 1935,भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947,



Act passed under the rule of the British Crown

भारत शासन अधिनियम - 1858

✅ ब्रिटिश संसद के भारत शासन अधिनियम , 1858 के द्वारा भारत का शासन ब्रिटिश ताज के अधीन कर दिया गया । 

✅ गवर्नर जनरल को अब भारत का वायसराय भी कहा जाने लगा, जो ब्रिटिश ताज का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि बन गया । 

✅ लॉर्ड कैनिंग भारत का प्रथम वायसराय बना । 

✅ इस अधिनियम द्वारा ' भारत के राज्य सचिव पद का सृजन किया गया , जिसमें भारतीय प्रशासन पर संपूर्ण नियंत्रण की शक्ति निहित थी । उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद के गठन का प्रावधान किया गया । 

भारत परिषद अधिनियम - 1861

✅ भारत परिषद अधिनियम , 1861 के द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की शुरुआत हुई । 

✅ इस अधिनियम द्वारा मद्रास एवं बंबई की प्रेसीडेंसियों को पुनः विधायी शक्तियां देकर विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की गई । 

✅ इसने वायसराय को आपातकाल में अध्यादेश जारी करने के लिए अधिकृत किया , जो अधिकतम 6 माह की अवधि तक प्रभावी हो सकता था । 

भारत परिषद अधिनियम - 1892

✅ भारत परिषद अधिनियम , 1892 के माध्यम से केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में अतिरिक्त ( गैर - सरकारी ) सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई । 

✅ केंद्रीय विधान परिषद के भारतीय सदस्यों को वार्षिक बजट पर बहस करने तथा सरकार से 6 दिन की पूर्व नोटिस पर प्रश्न पूछने का अधिकार भी दिया गया , परंतु पूरक प्रश्न पूछने तथा मतदान का अधिकार नहीं था । 

✅ सीमित अर्थों में निर्वाचन पद्धति का आरंभ किया जाना इस अधिनियम की महत्वपूर्ण विशेषता थी । 

भारत परिषद अधिनियम - 1909 

✅ भारत परिषद अधिनियम , 1909 को मार्ले - मिंटो सुधार के नाम से भी जानते हैं । 

✅ इस अधिनियम के द्वारा भारतीयों को विधि निर्माण तथा प्रशासन दोनों में प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया । 

✅ इसके तहत वायसराय की कार्यकारी परिषद में भारतीयों को पहली बार शामिल ( प्रथम - सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा ) किया गया । * इस अधिनियम ने केंद्रीय तथा प्रांतीय विधायिनी शक्ति को बढ़ा दिया । 

✅ परिषद के सदस्यों को बजट एवं लोकहित के विषयों की विवेचना करने , प्रस्ताव लाने तथा प्रश्न पूछने के साथ पूरक प्रश्न करने का अधिकार दिया गया । इसमें पृथक निर्वाचन के आधार पर मुस्लिमों के लिए सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया था । 

भारत शासन अधिनियम - 1919 

✅ भारत शासन अधिनियम , 1919 को मॉन्टेग्यू - चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से जाना जाता है । 

✅ इस अधिनियम के द्वारा पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली अपनाई गई । 

✅ सांप्रदायिक आधार पर निर्वाचन प्रणाली का विस्तार करते हुए इसे सिक्खों , भारतीय ईसाइयों , आंग्ल - भारतीयों तथा यूरोपियों के लिए भी लागू कर दिया गया । 

✅ इस अधिनियम द्वारा पहली बार केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था स्थापित की गई । 

✅ इस अधिनियम के द्वारा सभी विषयों को केंद्र तथा प्रांतों में बांट दिया गया । 

✅ द्विसदनीय केंद्रीय विधानमंडल समस्त ब्रिटिश भारत के लिए कानून बना सकती थी । 

✅ इस अधिनियम के तहत प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई । 

✅ प्रांतीय विषयों को दो भागों- आरक्षित तथा हस्तांतरित विषयों में बांटा गया । 

✅ इस अधिनियम में पहली बार ' उत्तरदायी शासन ' शब्द का प्रयोग किया गया । 

✅ इसके अंतर्गत एक आयोग का गठन किया जाना था , जिसका कार्य दस वर्ष बाद इस अधिनियम की समीक्षा करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना था । 

भारत शासन अधिनियम - 1935

✅ भारत शासन अधिनियम , 1935 द्वारा सर्वप्रथम भारत में संघात्मक सरकार की स्थापना की गई । 

✅ इस अधिनियम के द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त करके केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई । 

✅ भारत में मुद्रा एवं साख पर नियंत्रण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना की गई । 

✅ सांप्रदायिक निर्वाचन प्रणाली का विस्तार करते हुए दलित जातियों , महिलाओं और श्रमिकों को इसमें सम्मिलित किया गया । 

✅ इसी अधिनियम के तहत वर्ष 1937 में संघीय न्यायालय की स्थापना की गई । 

✅ इस अधिनियम द्वारा बर्मा को ब्रिटिश भारत से अलग कर दिया गया तथा दो नए प्रांतों सिंध और उड़ीसा का निर्माण हुआ । 

✅ इसके तहत कुछ प्रांतों में द्विसदनात्मक व्यवस्था की गई । 

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम - 1947 

✅ भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने 15 अगस्त , 1947 को भारत को स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र घोषित किया । 

✅ इसने वायसराय का पद समाप्त कर दोनों डोमिनयन राज्यों में गवर्नर जनरल का पद सृजित किया । 

✅ इसके अंतर्गत ब्रिटिश शाही उपाधि से ' भारत का सम्राट ' शब्द समाप्त कर दिया ।

ब्रिटिश ताज के शासनाधीन पारित अधिनियम

इस आर्टिकल मे हमने ब्रिटिश ताज के शासनाधीन पारित अधिनियम से संबंधित महवपूर्ण GK के बारे मे जाना है । हम आशा करते है की आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा और यह GK Notes आपके Exam के लिए महवपूर्ण हो । 

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